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सरदार बलवंत सिंह राजोअना:एक मुजरिम या एक क्रांतिकारी?

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पंजाब में सरदार बलवंत सिंह राजोअना की फांसी को रोकने की मांग को लेकर चल रहे आन्दोलन को देखते हुए केंद्र सरकार ने सरदार बलवंत सिंह राजोअना की फांसी पर रोक लगा दी है.
बलवंत सिंह राजोअना,जो की पंजाब के पूर्व मुख्य मंत्री बेअंत सिंह की बोंम्ब विष्फोट में हुई हत्या का आरोप है और इन आरोपों को उन्होंने ये कहते हुए स्वीकार किया है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार या इंदिरा गाँधी के मर्डर के बाद पंजाब में हुई हिंसा में बेअंत सिंह की भी गलती थी जिसके लिए उन्हें कोई सजा नहीं मिली थी.और इसी वजह से सरदार बलवंत सिंह और उनके साथियो को बेअंत सिंह को सजा देनी पड़ी जिसमे कि २० और लोगो कि जान भी गयी थी.
सरदार बलवंत सिंह ने कहा कि उन्हें अपना गुनाह मंजूर है और वो किसी तरह के रहम कि मांग भी नहीं करना चाहते क्योंकि इस काम के लिए उनके साथियों ने अपनी जान गवाई हैं और अगर उन्होंने सजा से बचना चाहा तो ये उनके साथियो के बलिदान के प्रति धोखा होगा.
इतना पढने के बाद लग सकता है कि बलवंत सिंह का केस दोबारा सोचने लायक है.पर अगर हम एक आतंकवादी से पूछे तो उसके पास अपने द्वारा कि गए सारे गुनाहों कि वजह होती है फिर वो चाहे व्यक्तिगत हो या देश या धरम के लिए. हर चोर के पास चोरी कि वजह होती है. गली मोहल्लों में लड़ाई करने वालो के पास भी अपनी सफाई में कुछ बातें होती हैं.पर क्या कानून उन सब के लिए बदल जाता है?
पर हमें यहाँ ये भी नहीं भूलना चाहिए कि हमारे देश में अजमल कसब,अफजल गुरु जैसे बहुत से ऐसे मुजरिम है जिनको बहुत ही संगीन गुनाहों के लिए मौत कि सजा सुनाई जा चुकी है पर अभी भी सजा दी नहीं गयी है फिर इस मुद्दे में बलवंत सिंह को भी रियायत मिलनी चाहिए भले ही उन्होंने इसकी मांग न कि हो पर एक पूरा राज्य उनके समर्थन में खड़ा है.फिर भी ये उनके गुनाह को कम नहीं कर देता.उन्होंने गुनाह किया है तो उन्हें सजा मिलनी ही चाहिए.क्योंकि कोई भी वजह २० लोगों(जिनमे कि मुख्यमंत्री भी शामिल है)कि हत्या को सही साबित नहीं कर सकती.१६ साल जेल में काटने के बाद अब वो सजा फांसी होगी या उम्र क़ैद, इस पर शायद सरकार विचार कर सकती है.
रसायन विज्ञान में एक अभिक्रिया होती है जिसे कहते हैं श्रंखला अभिक्रिया,जिसमे कि एक नाभिक का विघटन शुरू होकर दो बनते है और फिर दो से चार,चार से आठ और इस तरह अभिक्रिया बढती ही जाती है.अगर कुछ लोगो ने किसी से बदला लेने के कोई गुनाह किया और फिर दूसरी तरफ से भी इसी तरह का कोई कृत्य किया गया तो शायद ज़िन्दगी भी गुनाहों कि एक श्रंखला अभिक्रिया बन कर रह जाएगी.

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

चन्दन राय के द्वारा
April 3, 2012

, उत्तम आलेख सोचने को मजबूर करती बहुत सुन्दर पंक्तिया http://chandanrai.jagranjunction.com

    prateekraj के द्वारा
    April 4, 2012

    धऩयवाद चन्दन जी

yogi sarswat के द्वारा
March 31, 2012

मित्रवर आपने रसायन विज्ञानं को आधार बनाकर जिस तरह से अपनी बात कही है , वो काबिले तारीफ है ! बहुत बढ़िया ! आपका धयान चाहूँगा ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/03/26

    prateekraj के द्वारा
    March 31, 2012

    धऩयवाद योगी जी

मनु (tosi) के द्वारा
March 31, 2012

प्रतीक जी ! आपके विचार अच्छे हैं ।और लेखन भी बहुत अच्छा है … ऐसे ही लिखते रहिए आपका स्वागत है

    prateekraj के द्वारा
    March 31, 2012

    धऩयवाद मनु जी


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